'तुम'आना ब्याहने मुझको
तुम आना ब्याहने मुझको तो मत बन कर आना (दूल्हे) राजा
तुम हो कर आना आदमी,तलवार बांधकर मत आना
सूट, सेहरा, शेरवानी में जकड़कर मत आना
सादी शर्ट और फटी जींस में लगते हो तुम 'मेरे से'
आदमी से...
'मेरे आदमी' से!
तो मेरे आदमी! मत लाना बारात किसी चढ़ाई करती सेना सी
नहीं चाहिए...
'यह देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का '
बारात में मर्द मत लाना
ख़ुद भी मर्द होकर मत आना
तुम थोड़ी सी औरत हो कर आ जाना
बारात में लाना मां को,बहनों को ,चाचियों को,ताइयों को,मोहल्ले की औरतों को कि जिनसे पूछ सकूं मैं
बाबत तुम्हारे....
और जान सकूं कि तुम कितना 'स्त्री' हो
जान सकूं कि अपने गिर्द की औरतों की आंखों में तुम कब-कब विश्वास बन चमके कब-कब आंसू बनकर बहेपूछ सकूं कि गीत बन किसी कंठ से निकसे कि नहीं सिसकी बन किसी प्राण में विकसे कि नहीं,
कभी लड़े कि नहीं
'मां-चाची' के हक़ के लिए
कभी अड़े कि नहीं,बहन के इश्क़ के लिए,मोहल्ले की लड़कियों को भी
लाना बारात में
कि आश्वस्त हो सकूं
कि महफूज़ तो महसूस किया है ना उन्होंने ख़ुद को मौजूदगी में तुम्हारी।
मेरे आदमी!
मेरी बारात में अलबेले मस्तानों को मत नचाना
'यह देश है वीर जवानों का'
मत बजाना
डीजे वाले बाबू से कहना 'दीवानी मस्तानी' लगाए
सुनो!
मस्तानी से याद आया
उसे भी लाना बारात में
कि दम-दम में जीया है जिसने तुमको
कि तुम भी 'सांस-सांस'
'वह' ही थे (कभी)
वह लड़की जो जबरन ब्याह दी गई कहीं और मेरे लिए सबसे बड़ी आश्वस्ती है वह
तुम्हारे आदमी होने की
सबसे बड़ा प्रमाण है
तुम्हारे 'तुम' होने का।
मत लाना गहने जेवर कपड़े प्रेम करने आ रहे हो तो साथ लाना
प्रेम के सलीके वाले प्रमाण आदमियत के सबूत जब भांवरें पड़ें
तो पंडित की जगह बिठाना 'उसी लड़की को 'जो हर फेरे में बताए
तुम्हें छेड़ने के मंत्र
तुम्हें रुसा देने की छटाएं मना लेने की अदाएं
और फ़िर वही वर का हाथ दे
कन्या के हाथ में साक्षी मानकर 'पवित्र प्रेम' को वही करे कन्यादान वही दे 'वर...दान' वही है अधिकारिणी
तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में सौंपने की!
मेरे आदमी!
जब करा कर ले जाओ मुझे विदा तो तुम भी थोड़े से रो सकना
सिसक पड़ना मेरे भाई के कंधे पर रखकर हाथ अपना जूते चुराई की रश्म में छुटकी को रुपये मत देना
उसे देना 'तुम्हारी गीली पलकें'
यह नेग पाकर वह आश्वस्त हो जाएगी !
अम्मा-बाबा के साथ 'फूट पड़ना'
देखना उनकी आंखें आशीर्वाद में हंस पड़ेंगीं!
मेरे आदमी!
आदमी की तरह ब्याहने आना
ब्याह कर ले ही मत जाना
थोड़ा-थोड़ा सा मुझे छोड़ भी जाना
मेरे घर आंगन में मेरे अपनों में।।

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