जब तुमसे बात नहीं होती... ❤
दीवारों पर मकड़ियों ने जाले लगा रखे हैं। एक लंबे अरसे से शायद इन दीवारों को हमने देखा नहीं था। आज ही महसूस हुआ कि इस कमरे का रंग थोड़ा फीका है। लग रहा है जैसे एक सफ़र में कुछ छोड़ आये हैं। बाहर गिरती बरसात की बूदों का शोर सीने में खामोशी का सैलाब भर रहा है।
आज तुमसे बात नहीं हो सकी और जब तुमसे बात नहीं होती तो हम, हम नहीं रह जाते हैं। खुद को एकदम अकेला पा रहे हैं तुम्हारे बगैर। अचानक ही लग रहा है जैसे वक्त वहीं ठहर गया जहाँ तुमसे आखिरी दफ़े बात हुई थी और वहीं से फिर शुरू होगा जहाँ तुमसे फिर बात होगी। तुम्हारी बातों के बगैर हमारी दुनिया के रंग खोते जा रहे हैं।
तुम उम्मीद हो हमारी। आज जब तुमसे बात नहीं हो सकी है तो फोन में सहेजकर रखा कोई भी गीत मन की उदासी नहीं मिटा पा रहा है। आज महसूस हो रहा है कि शायद तुम्हे सुनते रहना हमारा सुकून है और तुम्हारी बातें हमारा पसंदीदा संगीत...
तुम्हारे बिना हम ख़यालों के सहरा में भटक रहे हैं। हम ढूंढ़ रहे हैं, दीवारों पर लगे जालों में, कमरे के फ़ीके पड़ते जा रहे रंगों में और बरसात की गिरती बूदों में कोई छूटी हुई बात तुम्हारी, तुम्हारा गुस्सा, तुम्हारा हँसी और तुम्हारा चेहरा, लेकिन कुछ भी नहीं पा सके हैं अब तक।
जब तुमसे बात नहीं होती तो हमारे होने की वज़ह नहीं मिलती है। तुम हो, तो हम हैं। तुम्हारी बातें हैं, तो रंग हैं हमारी दुनिया में, संगीत है, उम्मीदें हैं और ज़िंदगी है। तुम्हारी बातों के बगैर शायद हमारी रंगहीन दुनिया सलामत रह भी जाये, पर सनद रहे हमसफ़र, उस दुनिया में हम नहीं होंगे। ❤
'सोच'
#Monologue
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