मैं बहुत कहूँगा तुमसे
मैं बहुत कहूँगा तुमसे कि मुझे तुमसे प्यार नहीं, मगर मेरी बात मत मानना....
मुझे तुम सुन लेना भले ही ध्यान मत देना,
तुम भी आगे बढ़ जाओ ऐसा मत कहना
मुझसे कहना तुम कि तुम्हें जो कहना है कह लेना, आखिर चोट खाया हुआ हूँ, थोड़ा सह लेना
दिल पर मत लेना कभी गर गुस्से में ज़्यादा बोल जाऊँ, ज़ख्म तो तुमने भी खाया है उसे गर खोल जाऊँ
मैं कहूँ अगर तुमसे ऊँची आवाज़ में कुछ तो मेरे वो जज़्बात मत मानना
मैं बहुत कहूँगा तुमसे कि मुझे तुमसे प्यार नहीं, मगर मेरी बात मत मानना
जो बचा है प्रेम का रंग वो सारा मिला लेना,
मैं गुस्से में कभी फ़ोन काट दूँ तुम्हारा तो दोबारा मिला लेना
झूठा ही सही एक स्वांग मेरे लिए बना लेना,
दिल रखने के लिए ही सही मेरा, मुझे गुस्से में मना लेना
मैंने यादों के साथ नाइंसाफी की है तुम इंसाफ करती जाना,
मेरी छोटी छोटी भूलों को मगर माफ करती जाना
एक कहानी की तरह सुन लेना सब, तुम सच मेरे हालात मत मानना
मैं बहुत कहूँगा तुमसे कि मुझे तुमसे प्यार नहीं, मगर मेरी बात मत मानना||
हर बात का जवाब है हर बात के लिए सजग है
तुम्हारी दुनिया मेरी दुनिया से बहुत अलग है
बाहर से ज़िन्दगी मेरी लगती भले ही अंधेरी हो
मगर मेरी दुनिया में अभी भी तुम मेरी हो||
ये ज़मीन न रहे शायद, शायद ये आसमान न रहे
मेरा भी इस दुनिया में अगर नाम ओ निशान न रहे,
मैंने इतना तो कर दिया है कि मेरे बाद और तुम्हारे बाद
लोग मुझे न सही मगर करेंगे तुमको याद
क्योंकि मैंने अपने लफ़्ज़ों में तुम्हारा चेहरा उतारा है
मैंने तुम्हारे बिना वक़्त नहीं तुमको ही गुज़ारा है
तुम्हारी दुनिया में होते होंगे सवाल जवाब तुमसे, तुम इसे सवालात मत मानना
मैं बहुत कहूँगा तुमसे कि मुझे तुमसे प्यार नहीं, मगर मेरी बात मत मानना|
अगर पोस्ट पसंद आये तो लाइक,शेयर ,फॉलो ,सब्सक्राइब जरुर करें ||
0 टिप्पणियाँ
Please do not post any spam link in the comment section..