शक| love blog | love story | Life story | Sad story | love story hindi |Motivational story |Love quote

प्रेम जहाँ होगा वहाँ विश्वास होगा.
आप जब अपने प्रेमी/प्रेमिका पर शक कर रहे होते हैं, वास्तव में आप उन पर शक नहीं करके ख़ुद पर ही कर रहे होते हैं.
यही सच है क्यूँकि कहीं न कहीं आप ख़ुद को ले कर इनसिक्योर महसूस कर रहे होते हैं. आपको लगने लगता है कि सामने वाला आपसे बेहतर है तो वो आपके प्रेम को आप से छीन लेगा. ये आपकी हीनता का परिचायक है. इससे ज़्यादा कुछ भी नहीं.
मुझे कभी भी अपने प्रेम पर शक नहीं होता क्यूँकि मैं जानती हूँ कि उन्हें मुझ से बेहतर कोई भी नहीं मिलेगा. वैसे मैं लुक्स की बात नहीं कर रही हूँ (चाहें तो आप इंक्लूड कर सकते हैं ).
मुझे पता है जिस तरीक़े से मैं उनको समझती हूँ, जानती हूँ शायद ही वैसे कोई उनको समझ पाएगा. मैं जैसे कभी प्रेमिका, कभी पत्नी, कभी दोस्त और कभी माँ सरीखी हो जाती हूँ उनके लिए कोई और नहीं हो पाएगा.
ये मेरा ख़ुद को ले कर जो कॉन्फ़िडेन्स है न वही मुझे मेरे प्रेम पर शक नहीं होने देता. चाहे तो इसे आत्ममुग्धता का नाम दे सकते हैं, मगर हक़ीक़त यही है और इसीलिए हम सुखी हैं.
तो अगली बार जब भी आप अपने प्रेम पर शक करने को सोचें तो पहले सोच लीजिएगा कि आप ही में तो कहीं कोई कमी नहीं है. फिर पहले अपनी कमियों को दुरुस्त कीजिएगा फिर किसी पर ऊँगली उठिएगा.
बाक़ी प्रेम कीजिए. डुब-डुब कर कीजिए!
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