Chapter Closed
तो... फिर कभी नहीं मिले हम। ऐसा नहीं था कि मौका नहीं था, मिल सकता था मौका, पर उसे तलाशा ही नहीं गया। आज पूरा एक महीना हुआ, तेरे बिना इस एक महीने के सफर में जैसे सबकुछ पीछे छूट गया। दिल की धड़कन अब करतल ध्वनि नहीं करती। सांस सिर्फ जीने की औपचारिकता पूरी कर रही है, मौसम सर्द है लेकिन रक्त की गर्माहट तो जैसे बर्फ के पहाड़ में कहीं गुम है। जिंदा हूं, अब तो ये भी शक है।
तेरा कुछ भी नहीं,
इश्क़ भी मेरा, दर्द भी मेरा। 💕
तुमने देखे होंगे मोहब्बत के लाखों सपने, मैंने तो बस मोहब्बत से तुम्हें देखा है। दिनभर ना जाने कितनों चेहरों से रूबरू होता हूं, पर पता नहीं रात को ख्याल सिर्फ तेरा ही क्यों आता है। क्यों अब रात के इंतज़ार के बाद सुबह होती ही नहीं। हालांकि जिसे आंख बंद कर सोना कहते हैं, वो रात होती भी नहीं। डॉक्टर ने भी कह दिया है कि नींद की दवा रोगियों पर काम करती हैं इश्क वालों पर नहीं। तेरी आवाज के इंतजार में आंखें फोन की स्क्रीन पर क्यों टिकी रहती हैं, क्यों कान को वही रिंगटोन सुननी है, जो तेरे नंबर पर आज भी सेट है। प्रेम कितना सहमा होता है न! उंगलियां हैं, पर नंबर नहीं मिलातीं। तुम्हें दोबारा पाने से कहीं ज्यादा डर है फिर खो देने से। अगर आ गईं, और मैं सम्हाल न पाया तो! जानने लगा हूं कि मेरे हिस्से कभी नहीं आएंगे वो दरवाज़े जिन्हें खोल कर मैं तुम्हारा स्वागत कर सकूं। मेरे हिस्से तो आयी हैं वो अधखुली खिड़कियां जिनसे मैंने तुम्हारा जाना देखा है। तुमने शायद गौर न किया हो लेकिन, मैं हर बार तुम्हारे जाते वक्त तुम्हें जाता हुआ देखकर मायूस होता रहा हूं। और अब जब तू चली गई लगती है, तो कितना मायूस हूं, ये अंदाज़ा लगाना तेरे लिए तो मुश्किल नहीं।
यादों की शाल ओढ़के आवारा-गर्दियां,
काटी हैं हमने यूं भी दिसम्बर की सर्दियां। 🩶
'मर्द' शब्द शारीरिक बल का प्रतीक है, लेकिन मैं भावुक, संवेदनशील और तनिक मां- सा हूं तभी तो तुम आईं मेरे पास... बेझिझक तुम्हें अपनी पीड़ा सुना सकीं। मेरे कांधे पर सर रख कर बच्चे-सी रो सकीं। इसीलिए मैं तुझे मां का वात्सल्य, पिता की चिंताएं और पति का स्नेह दे पाया। और जब-जब प्रेमी बना तो इतना हक मान लिया कि जैसे शिकंजे में तुझे जकड़ना चाहा। बस, यहीं चूक हुई मुझसे। पर तुझे भी तो समझना चाहिए था कि मैं हूं तो एक इंसान ही, ईश्वर सा स्वभाव मिलता भी कहां है। और ईश्वर होने की हिमाकत तो ईश्वर खुद भी नहीं करने देता। तुमसे ही तो मांगना था तुझे, तुझे पाने को दुआ भी मांगता भी तो किससे, कोई दूसरा ख़ुदा भी नहीं है तेरे सिवा। तेरे जाने के बाद बदल गया, अब किसी दरवाजे पर दस्तक नहीं देता, नहीं मांगता किसी से कुछ तेरे धर्म का था वह तेरे बाद अधर्मी हो गया यानी लोगों की भाषा में नास्तिक।
सिरफिरे से होते हैं अल्फाज़ भी इश्क़ में,
लबों का साथ न मिले तो,
बह निकलते हैं निगाहों से नमी बनकर। 😢
समुद्र आंखों से भी बहा करता है, जिसका आवेग जल की तीव्रतम धारा से भी तेज। मेरे शब्द इसीलिए नम हैं। और, लिखने की गति इसलिए धीमी है वरना, अभी तक तो तेरी मोहब्बत के किस्सों की किताबें लिख दी होती मैंने। खुद हैरान हूं मैं अपने सब्र का पैमाना देख कर, तूने याद भी न किया और मैं इंतज़ार नहीं छोड़ पा रहा। मैं हार गया हूं, तुझे पाने में भी, तुझे भुलाने में भी। वज़ह है भी, मैं क्या कहूं तुझसे कि तेरा साथ कैसा है, तू ही एक शख्स पूरी कायनात जैसा है। जानता हूं कि दुनिया है, बहुतेरे हैं मेरे जैसे, पर जिसकी दुनिया तू ही है बस, वो तो मैं ही हूं ना। और इसीलिए मैं सर्वश्रेष्ठ हूं। कोई नहीं अब जिसे कह पाऊं, तो परछाईं से बात करता हूं, दिल के तो तू ही है पास, तुझसे बात कहता हूं। कहता हूं कि प्यार है तुझसे। मेरे असीम प्रेम का अतीत तू, वर्तमान तू और यकीन रख...भविष्य भी तू।
तेरा मिलना तो एक बहाना था,
हमें बने ही थे तबाह होने के लिए... ❤️🩹
गलतियां बेशक रहीं, क्योंकि मुझे तू चाहिए थी। पूरी की पूरी, उससे कम पर मेरा काम चल ही नहीं सकता था। मुझे शहर चाहिए था। जमीं चलने को और उड़ तुम्हारे पास आने को आसमान चाहिए था। मैं तुझे हिस्सों में नहीं पहचानता, मुझे तो पूरा का पूरा इंसान चाहिए था। हां, तू डूबी थी मुझमें, और इसी आदत के नतीजतन मुझे प्रेम में डूबा हुआ प्रिय चाहिए था मुझे हर रोज़ प्रेम महसूस कराने वाली प्रेमिका चाहिए थी। अब इसे खुशनसीबी कहूं, या बदकिस्मती, ऐसी ही थी तू, तो पड़ी आदत मेरी। कायनात है तू, मुझे पूरा जहान चाहिए था। पर, मैं अड़ा भी नहीं कभी। जो मिला, उससे ज्यादा मांगा जरूर, पर कम पर भी तो खुश ही रहा ना। जो तूने दिया मेरे खुदा, मैंने उसी पर सब्र कर लिया। याद कर ना मेरा तेरे हिसाब से बदलना, तेरे आने के फिर यूं हुआ कि सब्र की उंगली पकड़के मैं इतना चला कि रास्ते हैरान रह गए, खुद के लिए भी ये बदलाव मुझे आश्चर्यचकित करता है।
तेरे ना मिलने का... मलाल तो रहेगा..।
ख़ुद को लाख समझाऊं, मगर ख्याल तो रहेगा। ❤️
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